1-Balkand / Sarga 65
Shloka 39
Shloka
एवमुक्त्वा मुनिश्रेष्ठं वैदेहो मिथिलाधिपः।प्रदक्षिणं चकाराशु सोपाध्यायः सबान्धवः ॥३९॥
Sarga 65 / Shloka 39 Balkand