1-Balkand / Sarga 65
Shloka 32
Shloka
यज्ञं काकुत्स्थसहितः प्राप्तवानसि कौशिक।पावितोऽहं त्वया ब्रह्मन् दर्शनेन महामुने ॥ ३२॥
Sarga 65 / Shloka 32 Balkand