1-Balkand / Sarga 65
Shloka 29
Shloka
एष राम मुनिश्रेष्ठ एष विग्रहवांस्तपः।एष धर्मः परो नित्यं वीर्यस्यैष परायणम् ॥२९॥
Sarga 65 / Shloka 29 Balkand