1-Balkand / Sarga 65
Shloka 25
Shloka
ततः प्रसादितो देवैर्वसिष्ठो जपतां वरः।सख्यं चकार ब्रह्मर्षिरेवमस्त्विति चाब्रवीत् ॥२५॥
Sarga 65 / Shloka 25 Balkand