1-Balkand / Sarga 65
Shloka 20
Shloka
ब्राह्मण्यं तपसोग्रेण प्राप्तवानसि कौशिक।दीर्घमायुश्च ते ब्रह्मन् ददामि समरुद्गणः ॥२०॥
Sarga 65 / Shloka 20 Balkand