1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 65 / Shloka 17 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 65
Shloka 17

Balkand

77 Sarga
40 Shloka
1/65/17
1-Balkand / Sarga 65 Shloka 17
Shloka
तावत् प्रसादो भगवन्नग्निरूपो महाद्युतिः।
कालाग्निना यथा पूर्वं त्रैलोक्यं दह्यतेऽखिलम् ॥१७॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘जैसे पूर्वकालमें प्रलयकालिक अग्निने सम्पूर्ण त्रिलोकीको दग्ध कर डाला था, उसी प्रकार ये भी सबको जलाकर भस्म कर देंगे। यदि ये देवताओंका राज्य प्राप्त करना चाहें तो वह भी इन्हें दे दिया जाय। इनके मनमें जो भी अभिलाषा हो, उसे पूर्ण किया जाय’॥