1-Balkand / Sarga 65
Shloka 15
Shloka
ब्रह्मन् न प्रतिजानीमो नास्तिको जायते जनः।सम्मूढमिव त्रैलोक्यं सम्प्रक्षुभितमानसम् ॥१५॥
Sarga 65 / Shloka 15 Balkand