1-Balkand / Sarga 65
Shloka 12
Shloka
नह्यस्य वृजिनं किंचिद् दृश्यते सूक्ष्ममप्युत।न दीयते यदि त्वस्य मनसा यदभीप्सितम् ॥१२॥
Sarga 65 / Shloka 12 Balkand