1-Balkand / Sarga 64
Shloka 9
Shloka
कोकिलस्य तु शुश्राव वल्गु व्याहरतः स्वनम्।सम्प्रहृष्टेन मनसा स चैनामन्ववैक्षत ॥९॥
Sarga 64 / Shloka 9 Balkand