1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 64 / Shloka 5 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 64
Shloka 5

Balkand

77 Sarga
20 Shloka
1/64/5
1-Balkand / Sarga 64 Shloka 5
Shloka
तामुवाच सहस्राक्षो वेपमानां कृताञ्जलिम्।
मा भैषी रम्भे भद्रं ते कुरुष्व मम शासनम् ॥५॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘अत: देवेश्वर! मुझे उनसे बड़ा डर लगता है, आप मुझपर कृपा करें।’ श्रीराम! डरी हुई रम्भाके इस प्रकार भयपूर्वक कहनेपर सहस्र नेत्रधारी इन्द्र हाथ जोड़कर खड़ी और थर-थर काँपती हुई रम्भासे इस प्रकार बोले—‘रम्भे! तू भय न कर, तेरा भला हो, तू मेरी आज्ञा मान ले॥ ४-५॥