1-Balkand / Sarga 64
Shloka 13
Shloka
ब्राह्मणः सुमहातेजास्तपोबलसमन्वितः।उद्धरिष्यति रम्भे त्वां मत्क्रोधकलुषीकृताम् ॥१३॥
Sarga 64 / Shloka 13 Balkand