1-Balkand / Sarga 63
Shloka 10
Shloka
सव्रीड इव संवृत्तश्चिन्ताशोकपरायणः।बुद्धिर्मुनेः समुत्पन्ना सामर्षा रघुनन्दन ॥१०॥
Sarga 63 / Shloka 10 Balkand