1-Balkand / Sarga 62
Shloka 5
Shloka
त्रातुमर्हसि मां सौम्य धर्मेण मुनिपुंगव।त्राता त्वं हि नरश्रेष्ठ सर्वेषां त्वं हि भावनः ॥५॥
Sarga 62 / Shloka 5 Balkand