1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 62 / Shloka 3 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 62
Shloka 3

Balkand

77 Sarga
28 Shloka
1/62/3
1-Balkand / Sarga 62 Shloka 3
Shloka
तप्यन्तमृषिभिः सार्धं मातुलं परमातुरः।
विषण्णवदनो दीनस्तृष्णया च श्रमेण च ॥३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

श्रीराम! जब वे विश्राम करने लगे, उस समय महायशस्वी शुन:शेप ज्येष्ठ पुष्करमें आकर ऋषियोंके साथ तपस्या करते हुए अपने मामा विश्वामित्रसे मिला। वह अत्यन्त आतुर एवं दीन हो रहा था। उसके मुखपर विषाद छा गया था। वह भूख-प्यास और परिश्रमसे दीन हो मुनिकी गोदमें गिर पड़ा और इस प्रकार बोला—॥ २-३॥