1-Balkand / Sarga 62
Shloka 25
Shloka
स बद्धो वाग्भिरग्र्याभिरभितुष्टाव वै सुरौ।इन्द्रमिन्द्रानुजं चैव यथावन्मुनिपुत्रकः ॥२५॥
Sarga 62 / Shloka 25 Balkand