1-Balkand / Sarga 62
Shloka 22
Shloka
राजसिंह महाबुद्धे शीघ्रं गच्छावहे वयम्।निवर्तयस्व राजेन्द्र दीक्षां च समुदाहर ॥२२॥
Sarga 62 / Shloka 22 Balkand