1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 62 / Shloka 20 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 62
Shloka 20

Balkand

77 Sarga
28 Shloka
1/62/20
1-Balkand / Sarga 62 Shloka 20
Shloka
इमे च गाथे द्वे दिव्ये गायेथा मुनिपुत्रक।
अम्बरीषस्य यज्ञेऽस्मिंस्ततः सिद्धिमवाप्स्यसि ॥२०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘मुनिकुमार! अम्बरीषके इस यज्ञमें जब तुम्हें कुश आदिके पवित्र पाशोंसे बाँधकर लाल फूलोंकी माला और लाल चन्दन धारण करा दिया जाय, उस समय तुम विष्णुदेवता-सम्बन्धी यूपके पास जाकर वाणीद्वारा अग्निकी (इन्द्र और विष्णुकी) स्तुति करना और इन दो दिव्य गाथाओंका गान करना। इससे तुम मनोवांछित सिद्धि प्राप्त कर लोगे’॥ १९-२०॥