1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 62 / Shloka 2 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 62
Shloka 2

Balkand

77 Sarga
28 Shloka
1/62/2
1-Balkand / Sarga 62 Shloka 2
Shloka
तस्य विश्रममाणस्य शुनःशेपो महायशाः।
पुष्करं ज्येष्ठमागम्य विश्वामित्रं ददर्श ह ॥२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

श्रीराम! जब वे विश्राम करने लगे, उस समय महायशस्वी शुन:शेप ज्येष्ठ पुष्करमें आकर ऋषियोंके साथ तपस्या करते हुए अपने मामा विश्वामित्रसे मिला। वह अत्यन्त आतुर एवं दीन हो रहा था। उसके मुखपर विषाद छा गया था। वह भूख-प्यास और परिश्रमसे दीन हो मुनिकी गोदमें गिर पड़ा और इस प्रकार बोला—॥ २-३॥