1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 62 / Shloka 16 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 62
Shloka 16

Balkand

77 Sarga
28 Shloka
1/62/16
1-Balkand / Sarga 62 Shloka 16
Shloka
निःसाध्वसमिदं प्रोक्तं धर्मादपि विगर्हितम्।
अतिक्रम्य तु मद्वाक्यं दारुणं रोमहर्षणम् ॥१६॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘अरे! तुमलोगोंने निर्भय होकर ऐसी बात कही है, जो धर्मसे रहित एवं निन्दित है। मेरी आज्ञाका उल्लङ्घन करके जो यह दारुण एवं रोमाञ्चकारी बात तुमने मुँहसे निकाली है, इस अपराधके कारण तुम सब लोग भी वसिष्ठके पुत्रोंकी भाँति कुत्तेका मांस खानेवाली मुष्टिक आदि जातियोंमें जन्म लेकर पूरे एक हजार वर्षोंतक इस पृथ्वीपर रहोगे’॥ १६-१७॥