1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 62 / Shloka 14 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 62
Shloka 14

Balkand

77 Sarga
28 Shloka
1/62/14
1-Balkand / Sarga 62 Shloka 14
Shloka
कथमात्मसुतान् हित्वा त्रायसेऽन्यसुतं विभो।
अकार्यमिव पश्यामः श्वमांसमिव भोजने ॥१४॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘प्रभो! आप अपने बहुत-से पुत्रोंको त्यागकर दूसरेके एक पुत्रकी रक्षा कैसे करते हैं? जैसे पवित्र भोजनमें कुत्तेका मांस पड़ जाय तो वह अग्राह्य हो जाता है, उसी प्रकार जहाँ अपने पुत्रोंकी रक्षा आवश्यक हो, वहाँ दूसरेके पुत्रकी रक्षाके कार्यको हम अकर्त्तव्यकी कोटिमें ही देखते हैं’॥ १४॥