1-Balkand / Sarga 62
Shloka 11
Shloka
सर्वे सुकृतकर्माणः सर्वे धर्मपरायणाः।पशुभूता नरेन्द्रस्य तृप्तिमग्नेः प्रयच्छत ॥११॥
Sarga 62 / Shloka 11 Balkand