1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 61 / Shloka 18 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 61
Shloka 18

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/61/18
1-Balkand / Sarga 61 Shloka 18
Shloka
ममापि दयितं विद्धि कनिष्ठं शुनकं प्रभो।
तस्मात् कनीयसं पुत्रं न दास्ये तव पार्थिव ॥१८॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘प्रभो! भगवान् भार्गव कहते हैं कि ज्येष्ठ पुत्र कदापि बेचनेयोग्य नहीं है; परंतु आपको मालूम होना चाहिये जो सबसे छोटा पुत्र शुनक है, वह मुझे भी बहुत ही प्रिय है। अत: पृथ्वीनाथ! मैं अपना छोटा पुत्र आपको कदापि नहीं दूँगी॥ १७-१८॥