1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 60 / Shloka 30 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 60
Shloka 30

Balkand

77 Sarga
34 Shloka
1/60/30
1-Balkand / Sarga 60 Shloka 30
Shloka
एवमुक्ताः सुराः सर्वे प्रत्यूचुर्मुनिपुंगवम्।
एवं भवतु भद्रं ते तिष्ठन्त्वेतानि सर्वशः ॥३०॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उनके ऐसा कहनेपर सब देवता मुनिवर विश्वामित्रसे बोले—‘महर्षे! ऐसा ही हो। ये सभी वस्तुएँ बनी रहें और आपका कल्याण हो। मुनिश्रेष्ठ! आपके रचे हुए अनेक नक्षत्र आकाशमें वैश्वानरपथसे बाहर प्रकाशित होंगे और उन्हीं ज्योतिर्मय नक्षत्रोंके बीचमें सिर नीचा किये त्रिशंकु भी प्रकाशमान रहेंगे। वहाँ इनकी स्थिति देवताओंके समान होगी और ये सभी नक्षत्र इन कृतार्थ एवं यशस्वी नृपश्रेष्ठका स्वर्गीय पुरुषकी भाँति अनुसरण करते रहेंगे’॥