1-Balkand / Sarga 60
Shloka 23
Shloka
अन्यमिन्द्रं करिष्यामि लोको वा स्यादनिन्द्रकः।दैवतान्यपि स क्रोधात् स्रष्टुं समुपचक्रमे ॥२३॥
Sarga 60 / Shloka 23 Balkand