1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 6 / Shloka 7 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 6
Shloka 7

Balkand

77 Sarga
28 Shloka
1/6/7
1-Balkand / Sarga 6 Shloka 7
Shloka
नाल्पसंनिचयः कश्चिदासीत् तस्मिन् पुरोत्तमे ।
कुटुम्बी यो ह्यसिद्धार्थोऽगवाश्वधनधान्यवान् ॥१-६-७॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उस श्रेष्ठ पुरीमें कोई भी ऐसा कुटुम्बी नहीं था, जिसके पास उत्कृष्ट वस्तुओंका संग्रह अधिक मात्रामें न हो, जिसके धर्म, अर्थ और काममय पुरुषार्थ सिद्ध न हो गये हों तथा जिसके पास गाय-बैल, घोड़े, धन-धान्य आदिका अभाव हो॥ ७॥