1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 6 / Shloka 21 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 6
Shloka 21

Balkand

77 Sarga
28 Shloka
1/6/21
1-Balkand / Sarga 6 Shloka 21
Shloka
योधानामग्निकल्पानां पेशलानाममर्षिणाम् ।
सम्पूर्णा कृतविद्यानां गुहा केसरिणामिव ॥१-६-२१॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

शौर्यकी अधिकताके कारण अग्निके समान दुर्धर्ष, कुटिलतासे रहित, अपमानको सहन करनेमें असमर्थ तथा अस्त्र-शस्त्रोंके ज्ञाता योद्धाओंके समुदायसे वह पुरी उसी तरह भरी-पूरी रहती थी, जैसे पर्वतोंकी गुफा सिंहोंके समूहसे परिपूर्ण होती है॥ २१॥