1-Balkand / Sarga 6
Shloka 20
Shloka
सा तेनेक्ष्वाकुनाथेन पुरी सुपरिरक्षिता ।यथा पुरस्तान्मनुना मानवेन्द्रेण धीमता ॥१-६-२०॥
Sarga 6 / Shloka 20 Balkand