1-Balkand / Sarga 59
Shloka 20
Shloka
विकृताश्च विरूपाश्च लोकाननुचरन्त्विमान्।महोदयश्च दुर्बुद्धिर्मामदूष्यं ह्यदूषयत् ॥२०॥
Sarga 59 / Shloka 20 Balkand