1-Balkand / Sarga 59
Shloka 2
Shloka
इक्ष्वाको स्वागतं वत्स जानामि त्वां सुधार्मिकम्।शरणं ते प्रदास्यामि मा भैषीर्नृपपुंगव ॥२॥
Sarga 59 / Shloka 2 Balkand