1-Balkand / Sarga 59
Shloka 19
Shloka
सप्तजातिशतान्येव मृतपाः सम्भवन्तु ते।श्वमांसनियताहारा मुष्टिका नाम निर्घृणाः ॥१९॥
Sarga 59 / Shloka 19 Balkand