1-Balkand / Sarga 59
Shloka 17
Shloka
क्रोधसंरक्तनयनः सरोषमिदमब्रवीत्।यद् दूषयन्त्यदुष्टं मां तप उग्रं समास्थितम् ॥१७॥
Sarga 59 / Shloka 17 Balkand