1-Balkand / Sarga 59
Shloka 14
Shloka
कथं सदसि भोक्तारो हविस्तस्य सुरर्षयः।ब्राह्मणा वा महात्मानो भुक्त्वा चाण्डालभोजनम् ॥१४॥
Sarga 59 / Shloka 14 Balkand