1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 59 / Shloka 10 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 59
Shloka 10

Balkand

77 Sarga
22 Shloka
1/59/10
1-Balkand / Sarga 59 Shloka 10
Shloka
आजग्मुरथ देशेभ्यः सर्वेभ्यो ब्रह्मवादिनः।
ते च शिष्याः समागम्य मुनिं ज्वलिततेजसम् ॥१०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उनकी आज्ञा मानकर सभी शिष्य चारों दिशाओंमें चले गये। फिर तो सब देशोंसे ब्रह्मवादी मुनि आने लगे। विश्वामित्रके वे शिष्य उन प्रज्वलित तेजवाले महर्षिके पास सबसे पहले लौट आये और समस्त ब्रह्मवादियोंने जो बातें कही थीं, उन्हें सबने विश्वामित्रजीसे कह सुनाया॥