1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 58 / Shloka 7 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 58
Shloka 7

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/58/7
1-Balkand / Sarga 58 Shloka 7
Shloka
स राजा पुनरेवैतानिदं वचनमब्रवीत्।
प्रत्याख्यातो भगवता गुरुपुत्रैस्तथैव हि ॥७॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

गुरुपुत्रोंका वह क्रोधयुक्त वचन सुनकर राजा त्रिशंकुने पुन: उनसे इस प्रकार कहा—‘तपोधनो! भगवान् वसिष्ठने तो मुझे ठुकरा ही दिया था, आप गुरुपुत्रगण भी मेरी प्रार्थना नहीं स्वीकार कर रहे हैं; अत: आपका कल्याण हो, अब मैं दूसरे किसीकी शरणमें जाऊँगा’॥