1-Balkand / Sarga 58
Shloka 5
Shloka
बालिशस्त्वं नरश्रेष्ठ गम्यतां स्वपुरं पुनः।याजने भगवान् शक्तस्त्रैलोक्यस्यापि पार्थिव ॥५॥
Sarga 58 / Shloka 5 Balkand