1-Balkand / Sarga 58
Shloka 2
Shloka
प्रत्याख्यातोऽसि दुर्मेधो गुरुणा सत्यवादिना।तं कथं समतिक्रम्य शाखान्तरमुपेयिवान् ॥२॥
Sarga 58 / Shloka 2 Balkand