1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 58 / Shloka 15 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 58
Shloka 15

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/58/15
1-Balkand / Sarga 58 Shloka 15
Shloka
इदं जगाद भद्रं ते राजानं घोरदर्शनम्।
किमागमनकार्यं ते राजपुत्र महाबल ॥१५॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

श्रीराम! विश्वामित्रने देखा राजाका जीवन निष्फल हो गया है। उन्हें चाण्डालके रूपमें देखकर उन महातेजस्वी परम धर्मात्मा मुनिके हृदयमें करुणा भर आयी। वे दयासे द्रवित होकर भयंकर दिखायी देनेवाले राजा त्रिशंकुसे इस प्रकार बोले—‘महाबली राजकुमार! तुम्हारा भला हो, यहाँ किस कामसे तुम्हारा आना हुआ है। वीर अयोध्यानरेश! जान पड़ता है तुम शापसे चाण्डालभावको प्राप्त हुए हो’॥ १३—१५॥