1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 58 / Shloka 13 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 58
Shloka 13

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/58/13
1-Balkand / Sarga 58 Shloka 13
Shloka
दह्यमानो दिवारात्रं विश्वामित्रं तपोधनम्।
विश्वामित्रस्तु तं दृष्ट्वा राजानं विफलीकृतम् ॥१३॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

श्रीराम! विश्वामित्रने देखा राजाका जीवन निष्फल हो गया है। उन्हें चाण्डालके रूपमें देखकर उन महातेजस्वी परम धर्मात्मा मुनिके हृदयमें करुणा भर आयी। वे दयासे द्रवित होकर भयंकर दिखायी देनेवाले राजा त्रिशंकुसे इस प्रकार बोले—‘महाबली राजकुमार! तुम्हारा भला हो, यहाँ किस कामसे तुम्हारा आना हुआ है। वीर अयोध्यानरेश! जान पड़ता है तुम शापसे चाण्डालभावको प्राप्त हुए हो’॥ १३—१५॥