1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 58 / Shloka 10 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 58
Shloka 10

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/58/10
1-Balkand / Sarga 58 Shloka 10
Shloka
अथ रात्र्यां व्यतीतायां राजा चण्डालतां गतः।
नीलवस्त्रधरो नीलः पुरुषो ध्वस्तमूर्धजः ॥१०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

तदनन्तर रात व्यतीत होते ही राजा त्रिशंकु चाण्डाल हो गये। उनके शरीरका रंग नीला हो गया। कपड़े भी नीले हो गये। प्रत्येक अंगमें रुक्षता आ गयी। सिरके बाल छोटे-छोटे हो गये। सारे शरीरमें चिताकी राख-सी लिपट गयी। विभिन्न अंगोंमें यथास्थान लोहेके गहने पड़ गये॥१०॥