1-Balkand / Sarga 57
Shloka 21
Shloka
प्रत्याख्यातो वसिष्ठेन गतिमन्यां तपोधनाः।गुरुपुत्रानृते सर्वान् नाहं पश्यामि कांचन ॥२१॥
Sarga 57 / Shloka 21 Balkand