1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 57 / Shloka 20 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 57
Shloka 20

Balkand

77 Sarga
22 Shloka
1/57/20
1-Balkand / Sarga 57 Shloka 20
Shloka
ते मां भवन्तः सिद्ध्यर्थं याजयन्तु समाहिताः।
सशरीरो यथाहं वै देवलोकमवाप्नुयाम् ॥२०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘मैं समस्त गुरुपुत्रोंको नमस्कार करके प्रसन्न करना चाहता हूँ। आपलोग तपस्यामें संलग्न रहनेवाले ब्राह्मण हैं। मैं आपके चरणोंमें मस्तक रखकर यह याचना करता हूँ कि आपलोग एकाग्रचित्त हो मुझसे मेरी अभीष्टसिद्धिके लिये ऐसा कोई यज्ञ करावें, जिससे मैं इस शरीरके साथ ही देवलोकमें जा सकूँ॥ १९-२०॥