1-Balkand / Sarga 57
Shloka 10
Shloka
तपश्चचार धर्मात्मा काकुत्स्थ परमात्मवान्।एतस्मिन्नेव काले तु सत्यवादी जितेन्द्रियः ॥१०॥
Sarga 57 / Shloka 10 Balkand