1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 56 / Shloka 15 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 56
Shloka 15

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/56/15
1-Balkand / Sarga 56 Shloka 15
Shloka
देवर्षयश्च सम्भ्रान्ता गन्धर्वाः समहोरगाः।
त्रैलोक्यमासीत् संत्रस्तं ब्रह्मास्त्रे समुदीरिते ॥१५॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उन सब अस्त्रोंके शान्त हो जानेपर गाधिनन्दन विश्वामित्रने ब्रह्मास्त्रका प्रयोग किया। ब्रह्मास्त्रको उद्यत देख अग्नि आदि देवता, देवर्षि, गन्धर्व और बड़े-बड़े नाग भी दहल गये। ब्रह्मास्त्रके ऊपर उठते ही तीनों लोकोंके प्राणी थर्रा उठे॥ १४-१५॥