1-Balkand / Sarga 55
Shloka 9
Shloka
समुद्र इव निर्वेगो भग्नद्रंष्ट्र इवोरगः।उपरक्त इवादित्यः सद्यो निष्प्रभतां गतः ॥९॥
Sarga 55 / Shloka 9 Balkand