1-Balkand / Sarga 54
Shloka 14
Shloka
न बलं क्षत्रियस्याहुर्ब्राह्मणा बलवत्तराः।ब्रह्मन् ब्रह्मबलं दिव्यं क्षात्राच्च बलवत्तरम् ॥१४॥
Sarga 54 / Shloka 14 Balkand