1-Balkand / Sarga 54
Shloka 11
Shloka
नहि तुल्यं बलं मह्यं राजा त्वद्य विशेषतः।बली राजा क्षत्रियश्च पृथिव्याः पतिरेव च ॥११॥
Sarga 54 / Shloka 11 Balkand