1-Balkand / Sarga 53
Shloka 24
Shloka
दर्शश्च पौर्णमासश्च यज्ञाश्चैवाप्तदक्षिणाः।एतदेव हि मे राजन् विविधाश्च क्रियास्तथा ॥२४॥
Sarga 53 / Shloka 24 Balkand