1-Balkand / Sarga 53
Shloka 22
Shloka
एवमुक्तस्तु भगवान् विश्वामित्रेण धीमता।न दास्यामीति शबलां प्राह राजन् कथंचन ॥२२॥
Sarga 53 / Shloka 22 Balkand