1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 52 / Shloka 21 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 52
Shloka 21

Balkand

77 Sarga
23 Shloka
1/52/21
1-Balkand / Sarga 52 Shloka 21
Shloka
एह्येहि शबले क्षिप्रं शृणु चापि वचो मम।
सबलस्यास्य राजर्षेः कर्तुं व्यवसितोऽस्म्यहम्।
भोजनेन महार्हेण सत्कारं संविधत्स्व मे ॥२१॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘(उसे बुलाकर ऋषिने कहा—) शबले! शीघ्र आओ, आओ और मेरी यह बात सुनो—मैंने सेनासहित इन राजर्षिका महाराजाओंके योग्य उत्तम भोजन आदिके द्वारा आतिथ्य-सत्कार करनेका निश्चय किया है। तुम मेरे इस मनोरथको सफल करो॥ २१॥