1-Balkand / Sarga 52
Shloka 18
Shloka
एवं ब्रुवन्तं राजानं वसिष्ठं पुनरेव हि।न्यमन्त्रयत धर्मात्मा पुनः पुनरुदारधीः ॥१८॥
Sarga 52 / Shloka 18 Balkand